शिक्षक जिन्होने अपना जीवन योग के लिए समर्पित कर दिया

  नियमित योग ही स्वस्थ जीवन का मूलमंत्र है  

०-धार से ज्ञानेंद्र त्रिपाठीधार की रिपोर्ट

प्राचीनकाल में हमारे ऋषि मुनियों के द्वारा योग और आयुर्वेद के माध्यम से शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए आधारशिला रखी गई जो आज एक वटवृक्ष के रूप में भारत के हर शहर और प्रत्येक ग्रामो के साथ संपूर्ण विश्व में फैल चुका है।

और यही कारण है कि 21 जून को विश्व योग दिवस मनाये जाने लगा हैै औरे इस योग दिवस पर आज हम अमझेरा के ऐसे दो शिक्षको की बात कर रहे है जिन्हौने क्षेत्र में शिक्षा के प्रकाश के साथ ही योग और आयुर्वेद के माध्यम से जन जागरूता फैेलाकर विद्यार्थीयो के साथ ही लोगो को स्वस्थ्य जीवन जीने के लिए योग के लिए प्रेरित किया

और जिनसे प्रेरित होकर आज अनेक लोग नियमित योग कर अपने जीवन को स्वस्थ्य बनाये हुए है। अमझेरा के जन्मे योग गुरु जगदीशचंद्र शर्मा जिन्हौने अपना संपुर्ण जीवन योग के प्रति समर्पित कर दिया लोग उन्हे एक शिक्षक से ज्यादा योग गुरू के रूप में ज्यादा जानते है ।

उन्हौने शिक्षा के साथ ही योग के क्षेत्र में अलख जगाते हुए जिला और प्रदेश स्तर तक उन्होने अपनी एक अलग ही पहचान बनाई है और उन्हे इस कार्य के लिए कई बार पुरूस्कृत भी किया जा चुका है । योग के क्षेत्र में विभिन्न उपलब्धियों के साथ ही धार्मिक और राष्ट्रिय गीतो के माध्यम से योग कराया जाना भी उनकी विशेष उपलब्धियों में से एक है जिसके तहत कई प्रतिभावान छात्र-छात्राओं ने अपनी प्रस्तुतीयाॅ भी दी है

जिसे सभी के द्वारा सराहा गया है। आज वे बदनवार तहसील के कानवन के पास गाजनोद में शिक्षक के रूप में कार्यरत है तथा 62 वर्ष की आयु के साथ ही जुलाई माह में सेवानिवृत भी हो रहे है लेकिन उन्हौने बताया कि वे योग से कभी रिटायर्ड नहीं होगें और हमेशा योग करते औरे सीखाते रहेगें। 

वहीं अमझेरा के ही एक अन्य शिक्षक रामचंद्र शर्मा जो कि अमझेरा में ही शिक्षण संस्थान में कार्यरत होकर योग के प्रति अपना विशेष लगाव रखते है और योग के प्रति लोगो में जागरूकता भरते है जिसके कारण कई युवा और लोग योग सेे जुड़कर नियमित योगाभ्यास करते है।

युवाओ के आग्रह पर वे कई बार योग कक्षा  लगाकर शरीर को स्वस्थ्य रखने के लिए विभिन्न योगासन एवं प्रणायाम आदि के बारे में जानकारी देते है । वे भी 61 वर्ष की आयु को प्राप्त कर चुके है लेकिन नियमित योग से वे आज भी पूर्ण रूप से स्वस्थ्य  हैे और उन्हे किसी प्रकार की कोई बिमारी नहीं है वे लोगो को भी यही संदेश देते है कि नियमित योग ही स्वस्थ्य जीवन की चाबी है।

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शिक्षकद्वय बताते हे कि उचित संतुलित आहार और प्रतिदिन सुबह जल्दी उठकर पैदल घुमने के साथ ही प्राणायाम, अनुलोम-विलोम ,सूर्य नमस्कार, वृक्षासन,ताड़ासन और सामान्य सी शारीरिकी योगिय क्रिया करने मात्र से ही मनुष्य प्रथम सुख निरोगी काया के वाक्य को सफल बना सकते है।

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