मांधाता विधानसभा उपचुनाव में किसके सिर बंधेगा जीत का सेहरा

विधानसभा उपचुनाव को लेकर राजनीतिक गलियारों में तेज हुई हलचल

०-ओमकारेश्वर से मंगलसिंह ठाकुर की रिपोर्ट
मांधाता विधानसभा उपचुनाव को लेकर दोनों प्रमुख दल भाजपा एवं कांग्रेस के राजनीतिक गलियारे में दावेदारी के लिए हलचल तेज होने से माहौल कोरोना से हटकर राजनीतिक होने लगा है. राजनीतिक जोड़-तोड़ और राजनीतिक गणित की बातें विधानसभा क्षेत्र में सुनने को मिल रही है. भाजपा एवं कांग्रेस के प्रत्याशियों के साथ कई निर्दलीय भी मैदान में उतरने की तैयारी में लगे हुए हैं.

कांग्रेस के पूर्व विधायक नारायण पटेल कांग्रेस छोड़ भाजपा में चले गए हैं उनके समर्थक भाजपा में गए या नहीं यह आने वाला चुनाव परिणाम ही बताएगा. वर्तमान परिस्थितियों को देखते हुए दोनों पार्टी के कार्यकर्ता अपना मुंह खोलने से बच रहे हैं समयानुसार अपने पत्ते खोलने की बात कह रहे हैं. भाजपा एवं कांग्रेस दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ता अचानक नारायण पटेल के पाला बदलने से कुछ भी कहने की स्थिति में नहीं है.

सिर्फ कुछ कार्यकर्ता मुखर होकर बोल रही हैं कुछ तो जुबान खोलने से भी डर रहे हैं. बीजेपी से नारायण पटेल को टिकट मिला तो उनकी जीत में उनकी पार्टी के कार्यकर्ताओं के साथ भाजपा के कार्यकर्ता भी रोड़े बन सकते हैं और उन्हें हार का सामना करना पड़ सकता है. इसका सीधा फायदा कांग्रेस प्रत्याशी को मिल सकता है इस परिस्थिति को देखते हुए कांग्रेसी प्रत्याशी जीत सकता है.

किंतु यदि भाजपा से किसी अन्य को टिकट मिला तो वह कांग्रेस प्रत्याशी को कड़ी टक्कर दे सकता है और जीत की राह आसान होगी. अब यह पार्टी पर ही निर्भर है कि वह किसको टिकट देगी और जीत का सेहरा किसके माथे सजेगा यह आने वाला समय ही बताएगा. अभी तो सिर्फ कयास लगाए जा रहे हैं दोनों ही पार्टी के कार्यकर्ताओं को कड़ी मेहनत कर जनता का विश्वास जीतना पड़ेगा.

राजनीतिक हवा का रुख देखा जाए तो वह भाजपा के पक्ष में हैं लेकिन यदि उचित प्रत्याशी का चयन ना हुआ तो राजनीतिक हवा का उल्टा परिणाम भी हो सकता है यही स्थिति कांग्रेश की भी है कांग्रेस के कार्यकर्ता भी नारायण पटेल के बीजेपी में जाने से मानसिक रूप से आहत हैं और अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं अतः कांग्रेस को उम्मीदवार चयन में सावधानी बरतनी होगी कुछ नेताओं के निष्कासन एवं पार्टी में लेने का खेल भी अब चलने लगा है जो राजनीतिक गणित को बिगाड़ सकता है।

अतः ऐसे प्रत्याशी का चयन करना होगा जो सर्वमान्य हो और पुराने कर्ताओं के साथ तालमेल बिठाकर सभी को अपने साथ ले चलने में सक्षम हो ऐसे कार्यकर्ता को टिकट देकर विजय श्री हासिल होगी।

बड़े भाई की मौत के बाद पिता ने छोटे नाबालिग बेटे से तय कर दिया विवाह