स्वामी विवेकानंद अवतार थे, तुम भी अवतार बनो – डॉ विजय कुमार

स्वामी विवेकानंद

“स्वामी विवेकानन्द जी का एक बोध वाक्य जो मुझे प्रेरित करता है“ विषय पर हुई लेख प्रस्तुतिकरण प्रतियोगिता

 

उज्जैन।  रूपांतरण सामाजिक संस्था द्वारा युवा दिवस स्वामी विवेकानंद जयंती 2024 के उपलक्ष्य में लेख प्रस्तुतिकरण प्रतियोगिता “स्वामी विवेकानन्द जी का एक बोध वाक्य जो मुझे प्रेरित करता है“ का आयोजन किया गया। प्रतियोगिता में विजेता प्रतियोगियों को नगद राशि एवं ट्राफी देकर सम्मानित किया गया। रूपांतरण सभागार में आयोजित प्रतियोगिता का यह सफलतम 14वां वर्ष रहा।

पुरस्कार वितरण समारोह में डॉ. विजय कुमार, सी.जी. कुलपति, पाणिनी वैदिक एवं संस्कृत विश्वविद्यालय ने बच्चों से प्रश्न किया ‘‘नीचे आने को अवतरण कहते हैं, और अवतार शब्द उसी से बना है। क्या नीचे आने से कोई अवतार हो सकता है?’’ प्रश्न के पश्चात आपने बच्चों को समझाया, जिसे बोध / ज्ञान हो जाए और वह उस बोध या ज्ञान के साथ न रहते हुए दूसरों के जीवन की समस्या को उस बोध और ज्ञान से दूर करने नीचे आए, उन तक पहुंचे और बोध करवाए, वह अवतार होता है।

आपने नचिकेता को यम द्वारा मिले तीन वर में से तीसरे वर के प्रसंग को उदाहरण के रूप में लिया, जिसमें नचिकेता यम से मृत्यु का रहस्य जानना चाहते हैं। यम द्वारा कई प्रकार के प्रलोभन देने के बाद भी बालक अडिग रहता है, तब उसे यम मृत्यु विषय में ज्ञान देते है, जिसका ज्ञान नचिकेत ने संसार को कठोपनिषद द्वारा दिया है।

इस प्रकार बालक नचिकेता भी अवतार थे। आपने बच्चों को समझाया जिज्ञासा से ज्ञान प्राप्त होता है और ज्ञान सिर्फ प्राप्त करने की चीज़ नहीं है, उसे जीवन में उतारना होता है, यही हमारी सनातन संस्कृति का संदेश है। मनुष्य जन्म इसी लिए मिला है। यही कार्य स्वामी विवेकानंद ने किया। वे युवाओं के आदर्श हैं। उनके जीवन से यह सीख लें, इस सिद्धांत पर सब चलेंगे, ऐसा आपने बच्चों से संकल्प करवाया।

सारस्वत अतिथि, डॉ. शिवप्रसाद चौरसिया ने स्वामी विवेकानंद के चरित्र का उदाहरण दिया कि कैसे जब एक अंग्रेज युवती ने उनसे प्रणय संबध का प्रस्ताव रखा क्योंकि उसे उनके जैसे तेजस्वी पुत्र की कामना थी, तब अपने लक्ष्य पर स्थिर बने रहते हुए, स्वामीजी ने महिला से कहा, आज से मैं ही आपका पुत्र हूँ।

आनंदीलाल जोशी ने अध्यक्षीय उद्बोधन दिया। निर्णायक मंडल के अतीत अग्रवाल, डॉ. राजेंद्र गुप्त एवं कीर्ति सक्सेना ने भी अपने विचारो से युवाओं का मार्गदर्शन किया। संचालन रूपांतरण संस्था की निहारिका आसवानी और पूर्वा डोडिया ने किया। दीप मंत्र एवं प्रार्थना स्नेहा जाधव एवं विनीता ने किया।

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मेनका कुरील ने स्वागत एवं अतिथि परिचय दिया एवं बरखा कुरील, जितेन्द्र जाधव, सोनू पांचाल, मुक्तेश त्रिवेदी, कृति वर्मा, और ममता सिंह ने अन्य दायित्व निभाए। संस्था प्रमुख राजीव पाहवा ने संस्था एवं कार्यक्रम के उद्देश्य का परिचय दिया।

कार्यक्रम में प्रतिभागियों के शिक्षक भी विशेष तौर पर  उपस्थित रहे। संस्था के सदस्य डॉ. सखा पाहवा, डॉ. स्मिता भवालकर, कैलाश सोनी, अक्षय अमेरिया, अजय भातखंडे, अनंत त्रिवेदी, आदि भी उपस्थित रहे।

स्वामी विवेकानंद प्रतियोगिता के इस वर्ष के विजेता

प्रतियोगिता में प्रथम निकुंज ठाकुर ज्ञान सागर अकैडमी को पुरुस्कार स्वरूप राशि 5000, द्वितीय जेवी व्यास सेंट पॉल स्कूल को पुरुस्कार राशि 3500, तृतीय मृदुल परोहा ज्ञान सागर अकैडमी को पुरुस्कार राशि 2500 रूपये प्रदान की गई।

सांत्वना पुरस्कार राधिका पाटीदार स्वामी विवेकानंद हायर सेकेंडरी ताजपुर स्कूल हिंदी मीडियम, रिया डोडिया स्वामी विवेकानंद हायर सेकेंडरी ताजपुर स्कूल हिंदी मीडियम, ललित नागर लोकमान्य तिलक स्कूल, दीपिका विजवानी अक्षत इंटरनेशनल को प्रदान किया गया जिसमें प्रत्येक को 750 रूपये पुरस्कार स्वरूप प्रदान किये गये। इस वर्ष रनिंग ट्रॉफी के विजेता ज्ञान सागर एकेडमी रही।

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