सर्वांगासन : बालों और त्वचा की खूबसूरती के लिए जानिये इस योग के लाभ एवं विधि

 

सर्वांगासन (Sarvangasana) संस्कृत भाषा का शब्द है। इसका शाब्दिक अर्थ होता है, सभी अंगों का आसन (All Body Parts Pose)। सर्वांगासन, तीन शब्दों से मिलकर बना है। पहले शब्द है सर्व (Sarv) जिसका अर्थ होता है पूरा या संपूर्ण, जिसे अंग्रेजी में Entire भी कहा जाता है।

दूसरा शब्द है अंग (Anga), जिसका अर्थ भाग या हिस्से से है। इसे अंग्रेजी भाषा में Part कहा जाता है। तीसरा शब्द आसन (Asana) है, जिसका अर्थ किसी विशेष​ स्थिति में खड़े होने, लेटने या बैठने से है। इसे अंग्रेजी भाषा में Pose भी कहा जाता है। सर्वांगासन को कंधे के बल पर उल्टा खड़े होकर किया जाता है। इसी वजह से इसे कंदरासन (Kandrasana) भी कहा जाता है।

सर्वांगासन को योग की दुनिया में आसनों के माँ के नाम से पुकारा जाता है क्योंकि यह आसन शरीर के हर अंग को किसी न किसी तरह से स्वास्थ लाभ पहुंचाता है। माँ को देख कर मुस्कान छिपाए नहीं छुपती उसी तरह सर्वांगासन का प्रतिदिन अभ्यास करने से पूरा शरीर हर्ष व् उल्लास से भरा रहता है और साधक विभिन्न प्रकार की विकारों से भी बचता है। सर्वांगासन योग पूरे शरीर यानि पैर की उंगलियों से लेकर मस्तिष्क तक फायदा पहुंचता है। साथ ही साथ यह कई महत्वपूर्ण स्वास्थ्य लाभ के लिए जाना जाता है।

सर्वांगासन के लाभ

1 त्वचा की देखभाल : त्वचा की खूबसूरती सम्बंधित समस्याओं से अगर आप परेशान है तो आप को नियमित रूप से सर्वांगासन का अभ्यास करनी चाहिए। यह त्वचा की खूबसूरती को ही नहीं बढ़ाता बल्कि झुर्रियों, पिम्पल्स और उम्र बढ़ने की प्रक्रिया को रोकता है।
वजन को नियंत्रित करता है

2 बालों को गिरने से रोकता है : यह आसन बालों के लिए बहुत लाभदायक है। इसके नियमित अभ्यास से मस्तिस्क क्षेत्र में रक्त की सही आपूर्ति होती है जो पोषक तत्वों के आवागमन के लिए जरूरी है।

3 यह शरीर में मेटाबोलिज्म क्रिया को कण्ट्रोल करने में मदद करता और वजन के नियंत्रित में सहायक है।

4 सर्वांगासन थायराइड के लिए: इस आसन के अभ्यास से थायराइड और पैराथाइरॉइड जैसी ग्रंथियों को उचित रूप में पोषक तत्व एवं रक्त मिल पाता है जो थायराइड समस्याओं को हल करने के लिए मददगार है।

5 यौन समस्याओं के लिए : यौन समस्याओं और विकारों में इस आसन का बहुत लाभ पहुँचता है।

6 सर्वांगासन वैरिकाज़ शिरा के उपचार में : यह पैरों की रक्त वाहिकाओं में रक्त के दबाव कम कर देता है इस प्रकार जो लोग वैरिकाज़ नस से पीड़ित है उनके लिए यह आसन वरदान साबित हो सकता है।

7 सर्वांगासन से पेट में अल्सर रोकें : यह पेट से सम्बंधित अंगों को सक्रिय करता और उचित एंजाइम के स्राव में मदद करता है जिसके कारण कोलाइटिस, अल्सर, आदि से लोगों को छुटकारा मिल सके।

8 सर्वांगासन से नेत्र रोग उपचार: अगर आप इस आसन को किसी विशेषज्ञ के निगरानी में करते है तो आपकी नेत्र दृष्टि को ही नहीं बढ़ाता बल्कि नेत्र सम्बंधित परेशानियों से भी बचा जा सकता है।

9 सर्वांगासन कब्ज से छुटकारा दिलाता है : आसन आंत्र की मुक्त आवाजाही को नियंत्रित करता है और पूरी तरह से कब्ज ख़त्म कर देता है ।10 सर्वांगासन से उच्च रक्तचाप कम किया जा सकता है।

सर्वांगासन की विधि

सबसे पहले आप स्वच्छ आसन बिछाकर अपनी पीठ के बल सीधे लेट जाएं।धीरे – धीरे अपने पैरों को 90 डिग्री पर ऊपर उठाएं।धीरे से सिर को अपने पैरों की तरफ लाने का प्रयास करें।

आपकी ठोड़ी सीने से सटा कर रखें।30 सेकंड या उससे अधिक के लिए मुद्रा को बनाए रखने के लिए प्रयास करें।और फिर धीरे – धीरे पूरानी स्तिथी में वापस आ जाएँ।यह एक चक्र हुआ। इस तरह से आप 5 चक्र करें।

सावधानियां

हाई ब्लड प्रेशर के मरीज सर्वांगासन का अभ्यास न करें।डायरिया की शिकायत होने पर कभी भी ये आसन नहीं करना चाहिए।

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घुटनों में समस्या या आर्थराइटिस होने पर सर्वांगासन नहीं करना चाहिए।अगर गर्दन में दर्द की समस्या है तो आसन करते समय गर्दन न मोड़ें।शुरुआत में सर्वांगासन को योग ट्रेनर की देखरेख में ही करें।संतुलन बनने पर आप खुद भी ये आसन कर सकते हैं।

सर्वांगासन का अभ्यास शुरू करने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें।

_डॉ राव पी सिंह 
योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा
लाईफ ओके नेचर केयर एवं योगा सेंटर                                  संपर्क सूत्र 9672499053